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आलू प्याज भंडारण गृह खोलने के लिए इस राज्य में दी जा रही बंपर छूट

आलू प्याज भंडारण गृह खोलने के लिए इस राज्य में दी जा रही बंपर छूट

राजस्थान राज्य के 10,000 किसानों को प्याज की भंडारण इकाई हेतु 50% प्रतिशत अनुदान मतलब 87,500 रुपये के अनुदान का प्रावधान किया गया है। बतादें, कि राज्य में 2,500 प्याज भंडारण इकाई शुरू करने की योजना है। फसलों का समुचित ढंग से भंडारण उतना ही जरूरी है। जितना सही तरीके से उत्पादन करना। क्योंकि बहुत बार फसल कटाई के उपरांत खेतों में पड़ी-पड़ी ही सड़ जाती है। इससे कृषकों को काफी हानि वहन करनी होती है। इस वजह से किसान भाइयों को फसलों की कटाई के उपरांत समुचित प्रबंधन हेतु शीघ्र भंडार गृहों में रवाना कर दिया जाए। हालांकि, यह भंडार घर गांव के आसपास ही निर्मित किए जाते हैं। जहां किसान भाइयों को अपनी फसल का संरक्षण और देखभाल हेतु कुछ भुगतान करना पड़ता है। परंतु, किसान चाहें तो स्वयं के गांव में खुद की भंडारण इकाई भी चालू कर सकते हैं। भंडारण इकाई हेतु सरकार 50% प्रतिशत अनुदान भी प्रदान कर रही है। आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि राजस्थान सरकार द्वारा प्याज भंडारण हेतु नई योजना को स्वीकृति दे दी गई है। जिसके अंतर्गत प्रदेश के 10,000 किसानों को 2,550 भंडारण इकाई चालू करने हेतु 87.50 करोड़ रुपए की सब्सिड़ी दी जाएगी।

भंडारण संरचनाओं को बनाने के लिए इतना अनुदान मिलेगा

मीडिया खबरों के मुताबिक, किसानों को विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत प्याज के भंडारण हेतु सहायतानुदान मुहैय्या कराया जाएगा। इसमें प्याज की भंडारण संरचनाओं को बनाने के लिए प्रति यूनिट 1.75 लाख का खर्चा निर्धारित किया गया है। इसी खर्चे पर लाभार्थी किसानों को 50% फीसद अनुदान प्रदान किया जाएगा। देश का कोई भी किसान अधिकतम 87,500 रुपये का फायदा हांसिल कर सकता है। ज्यादा जानकारी हेतु निजी जनपद में कृषि विभाग के कार्यालय अथवा राज किसान पोर्टल पर भी विजिट कर सकते हैं। ये भी पढ़े: Onion Price: प्याज के सरकारी आंकड़ों से किसान और व्यापारी के छलके आंसू, फायदे में क्रेता

किस योजना के अंतर्गत मिलेगा लाभ

राजस्थान सरकार द्वारा प्रदेश के कृषि बजट 2023-24 के अंतर्गत प्याज की भंडारण इकाइयों पर किसानों को सब्सिड़ी देने की घोषणा की है। इस कार्य हेतु राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत 1450 भंडारण इकाइयों हेतु 12.25 करोड रुपये मिलाके 34.12 करोड रुपये व्यय करने जा रही है। इसके अतिरिक्त 6100 भंडारण इकाईयों हेतु कृषक कल्याण कोष द्वारा 53.37 करोड़ रुपये के खर्च का प्रावधान है। ये भी पढ़े: भंडारण की परेशानी से मिलेगा छुटकारा, प्री कूलिंग यूनिट के लिए 18 लाख रुपये देगी सरकार

प्याज की भंडारण इकाई बनाने की क्या जरूरत है

आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि इन दिनों जलवायु परिवर्तन से फसलों में बेहद हानि देखने को मिली है। तीव्र बारिश और आंधी के चलते से खेत में खड़ी और कटी हुई फसलें तकरीबन नष्ट हो गई। अब ऐसी स्थिति में सर्वाधिक भंडारण इकाईयों की कमी महसूस होती है। यह भंडारण इकाईयां किसानों की उत्पादन को हानि होने से सुरक्षा करती है। बहुत बार भंडारण इकाइयों की सहायता से किसानों को उत्पादन के अच्छे भाव भी प्राप्त हो जाते हैं। यहां किसान उत्पादन के सस्ता होने पर भंडारण कर सकते हैं। साथ ही, जब बाजार में प्याज के भावों में वृद्धि हो जाए, तब भंडार गृहों से निकाल बेचकर अच्छी आय कर सकते हैं।
इस राज्य में ट्रैक्टर खरीदने पर सरकार की तरफ से 1 लाख का अनुदान

इस राज्य में ट्रैक्टर खरीदने पर सरकार की तरफ से 1 लाख का अनुदान

कृषि कार्यों में किसानों का सबसे सच्चे साथी ट्रैक्टर कृषकों की आर्थिक स्थिति को सुधारने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 

खेती में सबसे ज्यादा उपयोग किए जाने वाले यंत्र मतलब कि ट्रैक्टर की खरीद पर कृषकों को मोटा अनुदान प्रदान किया जा रहा है। योजना का लाभ हांसिल करने के लिए किसान भाई शीघ्रता से आवेदन करें। 

आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि हरियाणा सरकार द्वारा ट्रैक्टर की खरीद पर यह अनुदान मुहैय्या कराया जा रहा है। हालांकि, सभी किसान अनुदान का फायदा नहीं उठा पाऐंगे। 

ये केवल अनुसूचित जाति के किसानों के लिए है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा अनुसूचित जाति के कृषकों को 45 एचपी व उससे ज्यादा क्षमता वाले ट्रैक्टर पर 1 लाख का अनुदान मुहैय्या कराया जा रहा है। 

इसके लिए किसान 26 फरवरी से 11 मार्च तक विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। 

जानिए किस प्रकार किया जाएगा चयन

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि हर एक जिले में लाभार्थी का चयन गठित जिला स्तरीय कार्यकारी समिति द्वारा ऑनलाइन ड्रॉ के जरिए किया जाएगा। 

चयन के उपरांत चयनित किसान को सूचीबद्ध अनुमोदित निर्माताओं से अपनी प्राथमिकता आधारित ट्रैक्टर मॉडल और मूल्य का चुनाव करके सिर्फ बैंक के जरिए से अपने भाग की कीमत अनुमोदित खाते में जमा करवानी होगी। 

ये भी पढ़ें: यह सरकार आधुनिक ट्रैक्टर की खरीदी पर दे रही है 50% तक सब्सिडी

डिस्ट्रीब्यूटर से किसान के विवरण, बैंक का विवरण, ट्रैक्टर मॉडल, मूल्य की मान्यता के पोर्टल या ई-मेल के जरिए अनुदान ई-वाउचर के लिए प्रार्थना करनी होगी।

पीएमयू और बैंक की जांच के पश्चात डिजिटल ई-वाउचर से मान्यता प्राप्त डिस्ट्रीब्यूटर को जारी किया जाएगा। अनुदान ई-वाउचर प्राप्त होने के शीघ्रोपरान्त किसान को उसकी चुनी हुई ट्रैक्टर के साथ बिल, बीमा, टेम्परेरी नंबर तथा आरसी के आवेदन शुल्क की रसीद इत्यादि दस्तावेजों को विभागीय पोर्टल पर अपलोड करने होंगे। 

दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन करना बेहद आवश्यक

जिलास्तरीय कार्यकारी समिति को ट्रैक्टर के समस्त जरूरी दस्तावेजों समेत भौतिक सत्यापन प्रस्तुत करना होगा। समिति सभी दस्तावेजों की जांच करने के बाद भौतिक सत्यापन रिपोर्ट फॉर्म के साथ पोर्टल पर अपलोड करेगी और निदेशालय को ईमेल के माध्यम से सूचित करेगी। निदेशालय स्तर पर जांच के पश्चात अनुदान स्वीकृति ई-वाउचर के जरिए से किसान को जारी करेगा।

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किसान भाई ज्यादा जानकारी हेतु यहां संपर्क करें 

किसान भाई ज्यादा जानकारी के लिए जिला कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक एवं सहायक कृषि अभियंता के कार्यालय से संपर्क साध सकते है। 

साथ ही, इच्छुक किसान कृषि विभाग की वेबसाइट www.agriharyana.gov.in पर जाकर विजिट करें। इसके अतिरिक्त टोल फ्री नंबर 1800-180-2117 पर भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

रोटरी हार्वेस्टर मशीन पर 80 प्रतिशत सब्सिडी दे रही है ये राज्य सरकार, यहां करें आवेदन

रोटरी हार्वेस्टर मशीन पर 80 प्रतिशत सब्सिडी दे रही है ये राज्य सरकार, यहां करें आवेदन

रबी का सीजन प्रारंभ हो चुका है। ऐसे में खेतों की जुताई की जा रही है ताकि खेतों को बुवाई के लिए तैयार किया जा सके। बहुत सारे खेतों में अब भी पराली की समस्या बनी हुई है, जिसके कारण खेतों को पुनः तैयार करने में परेशानी आ रही है। खेतों से फसल अवशेषों को निपटाना बड़ा ही चुनौतीपूर्ण काम है, इसमें बहुत ज्यादा समय की बर्बादी होती है। अगर किसान एक बार पराली का प्रबंधन कर भी ले, तो इसके बाद भी खेत से बची-कुची ठूंठ को निकालने में भी किसान को कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। लेकिन यदि आज की आधुनिक खेती की बात करें तो बाजार में ऐसी कई मशीनें मौजूद है जो इस समस्या का समाधान चुटकियों में कर देंगी। इन मशीनों के प्रयोग से अवशेष प्रबंधन के साथ-साथ खेतों की उर्वरा शक्ति में भी बढ़ोत्तरी होगी। ऐसी ही एक मशीन आजकल बाजार में आ रही है जिसे रोटरी हार्वेस्टर मशीन कहा जाता है। यह मशीन फसल के अवशेषों को नष्ट करके खेत में ही फैला देती है। यह मशीन किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है। इस मशीन के फायदों को देखते हुए बिहार सरकार ने मशीन की खरीद पर किसानों को 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी देने के लिए कहा है।

क्या है रोटरी हार्वेस्टर मशीन

इस मशीन को रोटरी मल्चर भी कहा जाता है, यह मशीन बेहद आसानी से खेत में बचे हुए अनावश्यक अवशेषों को नष्ट करके खेत में फैला देती है, जिसके कारण खेत में पर्याप्त नमी बरकरार रहती है। इसके साथ ही खेत में फैले हुए अवशेष डीकंपोज होकर खाद में तब्दील हो जाते हैं। अवशेषों के प्रबंधन की बात करें तो यह मशीन खेत में उम्दा प्रदर्शन करती है।

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रोटरी हार्वेस्टर मशीन पर बिहार सरकार कितनी देती है सब्सिडी

अगर रोटरी हार्वेस्टर मशीन की बात करें तो उस मशीन पर बिहार सरकार किसानों को 75 से 80 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान करती है। यह सब्सिडी बिहार का कृषि विभाग 'कृषि यंत्रीकरण योजना' के अंतर्गत किसानों को उपलब्ध करवाता है। बिहार सरकार के द्वारा जारी आदेश के अनुसार यदि बिहार का सामन्य वर्ग का किसान रोटरी हार्वेस्टर मशीन लेने के लिए आवेदन करता है, तो उसे बिहार सरकार मशीन की खरीद पर 75 प्रतिशत तक की सब्सिडी या अधिकतम 1,10,000 रुपये प्रदान करेगी। इसके साथ ही यदि बिहार का एससी-एसटी, ओबीसी और अन्य वर्ग का किसान रोटरी हार्वेस्टर मशीन खरीदना चाहता है, तो आवेदन करने के बाद सरकार उसे रोटरी मल्चर पर 80 प्रतिशत तक सब्सिडी और रूपये में अधिकतम 1,20,000 रुपये की सब्सिडी प्रदान करेगी।

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रोटरी हार्वेस्टर मशीन पर सब्सिडी प्राप्त करने के लिए ऐसे करें आवेदन

बिहार सरकार के आदेश के अनुसार रोटरी हार्वेस्टर मशीन पर सब्सिडी प्राप्त करने के लिए किसान को बिहार का निवासी होना जरूरी है। साथ ही उसके पास कृषि योग्य भूमि भी होनी चाहिए। ऐसे किसान जो रोटरी हार्वेस्टर मशीन पर सब्सिडी प्राप्त चाहते हैं, वो बिहार कृषि विभाग के पोर्टल https://dbtagriculture.bihar.gov.in/ पर जाकर अपना ऑनलाइन आवेदन भर सकते हैं। किसानों को ऑनलाइन आवेदन भरते समय आधार कार्ड, पैन कार्ड, जमीन के कागजात, पासपोर्ट साइज फोटो, बैंक खाता संख्या और मोबाइल नंबर अपने साथ रखना चाहिए। इनकी डीटेल आवेदन भरते समय किसान से मांगी जाएगी। इसके अलावा यदि किसान कृषि यंत्रों से संबंधित किसी भी प्रकार की अन्य जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो वो कृषि विभाग के हेल्पलाइन नंबर 18003456214 पर भी संपर्क कर सकते हैं।

पोस्ट ऑफिस ने चलाई योजना, किसानों को मिलेगा लाभ

पोस्ट ऑफिस ने चलाई योजना, किसानों को मिलेगा लाभ

शहरों के मुकाबले, गांव की अर्थव्यवस्था एक दूसरे से काफी अलग होती है. गांव के लोग खेती, किसानी और पाशुपालन जैसे काम करके अपनी आजीविका चलाते हैं. ऐसे सरकार उनकी आबादी की आय और कई तरह की सुविधाएं देने की लिए योजनाएं बना रही है. जिनके चलते ग्रामीण किसान अपने भविष्य को सुरक्षित कर सकें. इसी के तर्ज पर काफी लोग कई जगह निवेश करते हैं. लेकिन बात पोस्ट ऑफिस की करें, तो इसकी कुछ योजनाएं पैसों को बढ़ाने में मदद कर रही हैं. पोस्ट ऑफिस ग्राम सुरक्षा योजना भी इसी योजना का हिस्सा है. जो खास तौर पर ग्रामीण आबादी के लिए ही चलाई जा रही है. इस योजना के तहत लाभार्थियों को सिर्फ 50 रुपये रोज के हिसाब से निवेश करना होगा. हालांकि यह पैसा हर दिन नहीं देना होगा. बल्कि हर महीने एक मुश्त 15 सौ रुपये जमा करने होंगे. जिसके बदले एन निश्चित समय के बाद 35 लाख रुपये का रिटर्न मिल सकता है.

कैसे मिलता है योजना का लाभ?

19 साल की उम्र से लेकर 35 साल की उम्र तक कोई भी पोस्ट ऑफिस ग्राम सुरक्षा योजना में आवेदन कर सकता है. इस स्कीम के तहत 10 हजार से लेकर 10 लाख रुपये का निवेश करने की सहूलियत दी जाती है. अगर आप चाहें तो इसे महीने से लेकर तिमाही, छमाई या फिर हर साल भी निवेश कर सकते हैं. ये भी देखें:
जनधन योजना की खाताधारक महिलाओं को तीन माह तक 500 रुपए की मदद इसके अलावा हर रोज 50 रुपये या फिर महीने में 15 सौ रुपये का आंशिक निवेश करना होता है. उसके बाद आपको 31 से 35 लाख तक का रिटर्न मिल सकता है. इंवेस्ट करने वाले लाभार्थी की मौत अगर 80 साल की उम्र में होती है, तो बोनस के साथ पूरा पैसा उसके लाभार्थी को मिल सकता है.

चार साल तक निवेश पर लोन की सुविधा

पोस्ट ऑफिस ग्राम सुरक्षा योजना के तहत निवेश करने वाले लाभार्थी को चार साल तक निवेश करने पर लोन की सुविधा भी दी जाती है. अगर लाभार्थी लगातार पांच साल तक इंवेस्ट करता है, तो उसे बोनस मिलना शुरू हो जाता है. वहीं अगर लाभार्थी बीच में ही इसे छोड़ना चाहे तो तारीख के तीन साल बाद इस सुविधा का फायदा उठाना चाहिए.

पैसे मिलने की पॉलिसी

जो भी लाभार्थी पोस्ट ऑफिस ग्राम सुरक्षा योजना के तहत निवेश करेंगे उन्हें उनकी 80 साल की उम्र पूरी करते ही पॉलिसी की पूरी रकम सौंप दी जाएगी. नियमों के मुताबिक 55 साल के निवेश पर 31 लाख 60 हजार रुपये, ५८ साल में 33 लाख 40 हजार और ६०साल पर 34 लाख 60 हजार रुपयों का लाभ दिया जाएगा. अगर आप भी इस योजना का लाभ पाना चाहते हैं तो www.indiapost.gov.in यहां पर संपर्क कर सकते हैं.
प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना के तहत दी जाएगी किसानों को पेंशन; जाने क्या है स्कीम

प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना के तहत दी जाएगी किसानों को पेंशन; जाने क्या है स्कीम

भारत सरकार किसानों के कल्याण के लिए समय-समय पर कई तरह की योजनाएं चलाती रहती है. अभी भी सरकार द्वारा किसानों के हित का ध्यान रखते हुए पीएम किसान सम्मान निधि, किसान समृद्धि केंद्र, किसान क्रेडिट कार्ड और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना समेत कई तरह की योजनाएं चलाई जा रही है. 

हम सभी जानते हैं कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को हर साल ₹6000 दिए जाते हैं जो उन्हें ₹2000 की किस्त में तीन बार खाते में दिए जाते हैं. 

सरकार द्वारा किसानों को उनके बुढ़ापे के दौरान मदद करने के लिए एक पेंशन स्कीम भी चलाई जा रही है. प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना के तहत किसान सरकार से पेंशन ले सकते हैं.

क्या है प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना?

प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना सरकार के द्वारा चलाई गई योजना है जो छोटे और सीमांत किसानों के लिए चालू की गई है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य बुढ़ापे में किसानों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा देना है. 

18 से 40 साल की उम्र के किसान इस योजना के तहत फायदा ले सकते हैं. अगर जमीन की बात की जाए तो 2 हेक्टेयर तक की खेती योग्य भूमि वाले छोटे और सीमांत किसान इस योजना के लिए आवेदन दे सकते हैं. 

इसके अलावा अगर उनके नाम पर राज्य या फिर केंद्र शासित प्रदेशों में किसी भी तरह की भूमिका रिकॉर्ड है तो इस योजना के तहत उन्हें योग्य नहीं माना जाएगा. प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना के अनुसार एक बार किसान जब 60 वर्ष की उम्र पूरी कर लेता है तो उसके बाद उन्हें हर महीने ₹3000 की न्यूनतम पेंशन सरकार द्वारा दी जाएगी.  

इसके अलावा अगर किसी कारण से किसान की मृत्यु हो जाती है तो किसान की पत्नी या फिर परिवार को पेंशन का आधा हिस्सा यानी कि 50% पेंशन मुहैया करवाई जाएगी. सरकार द्वारा दी जाने वाली यह पेंशन केवल पति पत्नी के लिए ही लागू है एक बार किसान की मृत्यु होने पर उसके बच्चे इस योजना के तहत लाभ नहीं उठा सकते हैं. 

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कितने किसान  दे रहे हैं आवेदन?

इस योजना के तहत 18 से 40 वर्ष की आयु के बीच में किसान आवेदन दे सकता है.  इस स्कीम का लाभ उठाने के लिए किसानों को 60 साल की उम्र तक हर महीना केवल 55 से ₹200 का योगदान करना होगा. 

एक बार 60 वर्ष का हो जाने के बाद आप इस स्कीम के तहत पेंशन राशि प्राप्त करने के लिए योग्य हो जाते हैं. इसके बाद हर महीने उनके पेंशन खाते में एक निश्चित राशि सरकार द्वारा जमा होती रहेगी. 

इस योजना में सरकार मिलान योगदान देती है. उदाहरण के लिए अगर कोई भी किसान खाते में ₹200 जमा कर रहा है तो सरकार की तरफ से भी उस खाते में ₹200 जमा किए जाएंगे. आंकड़ों की मानें तो अभी तक लगभग 2 करोड़ से ज्यादा किसान प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना के विकल्प को चुनने के लिए आवेदन दे चुके हैं

राजस्थान सरकार ने चलाई छात्रा प्रोत्साहन योजना, मिलेगा 40 हजार का अनुदान

राजस्थान सरकार ने चलाई छात्रा प्रोत्साहन योजना, मिलेगा 40 हजार का अनुदान

हमारा देश भारत एक कृषि प्रधान देश है. इस वजह से इसका औधा पूरी दुनिया में सबसे ऊंचा माना जाता है. देश का ये स्थान हमेशा कायम रहे, इसके लिए सरकार भी कृषि से जुड़ी कई योजनाओं को धरातल पर उतार रही है. किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कई तरह के लोन, सब्सिडी और बीमे का इंतजाम कर रखा है. किसान परिवारों की आय के साथ खुशहाली बढ़े, इस ओर भी सरकार की तरफ से लगातार प्रयास जारी हैं. लेकिन देश का भविष्य यानि की युवा वर्ग को सरकार इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही है. सरकार का ध्यान खासतौर पर उन किसान परिवारों की तरफ ज्यादा है, जो खेती किसानी के सेक्टर में इंटरेस्ट रखते हैं. जिनकी पढ़ाई के लिए स्कालरशिप का प्रावधान किया है. जिसे देखते हुए अब राजस्थान सरकार ने छात्रा प्रोत्साहन योजना चलाई है. जिसे लेकर बेटियों को एग्रीकल्चर की पढ़ाई के लिए 40 हजार रुपये का अनुदान भी दिया जा रहा है.

जानिए क्या है छात्रा प्रोत्साहन योजना

राजस्थान सरकार ने अभी हाल ही में अपना बजट पेश किया. जिसमें सरकार ने छात्रा प्रोत्सहन योजना की सहायता राशि को बढ़ा दिया है. ऐसे में जिन भी बेटियों को कृषि के क्षेत्र में रूचि है, उनके लिए एग्रीकल्चर स्टडीज के लिए 40 हजार रुपये का अनुदान मिलेगा. अब तक छात्रा प्रोत्साहन योजना के तहत 11वीं और 12वीं कक्षा की बेटियों को एग्रीकल्चर की पढ़ाई के लिए 5 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलती थी. लेकिन राजस्थान ने अपने आम बजट में 5 हजार की प्रोत्साहन राशि को बढ़ाकर 15 हजार रूपये कर दी गयी है. ये भी देखें: महिला किसान केवल एक क्लिक करते हुए मुफ्त बीज वितरण योजना का फायदा कैसे उठाएं

जानिए कितना कितना बढ़ा अनुदान

  • एग्रीकल्चर में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए जहां 12 हजार रुपये का अनुदान मिलता था, वहीं इस अब राशि को बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दिया गया है.
  • एग्रीकल्चर में पीएचडी करने वाली छात्राओं को अब तक 15 हजार रुपये का अनुदान मिलता था, जिसे बढ़ाकर 40 हजार रुपये कर दिया गया है.
  • एग्रीकल्चर के क्षेत्र में पढ़ाई के लिए सरकार की तरफ यह अनुदान हर साल दिया जाता है. लेकिन इस बार राजस्थान सरकार ने अपने आम बजट में इजाफा करते हुए कुल 50 करोड़ के अनुदान का प्रावधान किया है.
हालांकि राजस्थान सरकार की छात्रा प्रोत्साहन योजना का फायदा एग्रीकल्चर की स्टडी करने वाली हर बेटी ले सकती है. लेकिन इसके लिए सरकार ने कुछ योग्यता भी निर्धारित की है. ये योग्यता की है, चलिए जान लेते हैं.
  • इस स्कीम में आवेदन करने वाली छात्रा का मूल निवास राजस्थान होना जरूरी है.
  • जो छात्राएं राजस्थान के गांव या शहर में रहती हैं, वो सभी इस योजना का लाभ ले सकती हैं.
  • आवेदन करने वाली छात्राओं का बैंक में अकाउंट होना जरूरी है.

क्या होने चाहिए दस्तावेज?

  • छात्रा जा आधार कार्ड होना जरूरी है.
  • छात्रा का मूल निवास प्रमाण पत्र होना जरूरी है.
  • छात्रा के पास लास्ट क्लास की मार्कशीट होनी चाहिए.
  • आवेदक छात्रा के पास संस्था प्रधान का ई साइन प्रमाण पत्र होना चाहिए.
  • छात्राओं के पास रेगुलर स्टूडेंट संस्था का प्रमाण पत्र होना जरूरी है.

ऐसे करें अप्लाई

रजस्थान की रहने वाली बेटियां जो एग्रीकल्चर सेक्टर की पढ़ाई करना चाहती हैं, वो सभी छात्राएं सरकार की छात्रा प्रोत्साहन स्किन का फायदा ले सकती हैं. इस स्कीम में अप्लाई करने के लिए सबसे पहले राजस्थान सरकार के ऑफिशियल पोर्टल राज किसान साथी पर जाना होगा. इसके अलावा सारे डॉक्यूमेंट तैयार करके ई मित्र केंद्र के जरिये भी अप्लाई कर सकते हैं.
पाइपलाइन की खरीद और वाटर टैंक के निर्माण पर मिल रहा अनुदान, ऐसे करें आवेदन

पाइपलाइन की खरीद और वाटर टैंक के निर्माण पर मिल रहा अनुदान, ऐसे करें आवेदन

राजस्थान के किसानों के लिए सरकार की तरफ से एक और बड़ी खुशखबरी है. बता दें सिंचाई पाइपलाइन और वाटर टैंक निर्माण पर किसानों को भारी अनुदान दिया जा रहा है. गर्मियों के सीजन में किसानों को सबसे ज्यादा फसलों की सिंचाई के लिए पानी की जरूरत पड़ती है. अब ऐसे में उन्हें सिंचाई के लिए पानी की कमी न हो, इसके लिए राजस्थान सरकार ने अच्छी पहल की है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब मौसम में बदलाव होने के साथ साथ तापमान भी बढ़ रहा है. जिसे देखते हुए देश के कई राज्यीं में किसानों ने सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था शुरू कर दी है. खेतों में तालाब बनाए जाने के साथ-साथ सूक्ष्म सिंचाई संयंत्रो की स्थापना की जा रही है. जिससे खपत कम हो और फसलों का उत्पादन ज्यादा हो. राजस्थान सरकार ने किसानों की जरूरतों को देखते हुए वाटर टैंक निर्माण के साथ साथ सिंचाई पाइपलाइन की खरीद पर भारी अनुदान देने का फैसला कर लिया है. बता दें राजस्थान में पानी का संकट बढ़ता जा रहा है. वहीं धूप और गर्मी की वजह से पानी का स्तर और नीचे चला जाता है. जिससे फसलों का अच्छा उत्पादन नहीं हो पाता. ऐसे में वाटर टैंक और सिंचाई पाइपलाइन से इस परेशानी को दूर करने में मदद मिल सकती है. इसमें सबसे अच्छी बात यह है कि, इन सब में खर्चे का बोझ अकेले किसानों के कंधे पर नहीं आएगा. सिंचाई पाइपलाइन की खरीद पर 60 फीसद एयर वाटर टैंक निर्माण में 90 हजार रुपये का अनुदान सरकार की ओर से दिया जा रहा है.

सिंचाई पाइपलाइन की खरीद पर मिलेगा इतना अनुदान

राजस्थान के किसानों को सिंचाई पाइपलाइन की खरीद पर राज्य की सरकार ने भरी अनुदान देने का फैसला किया है. इस स्कीम की बात करें तो, इसमें छोटे और बड़े किसानों को सिंचाई के लिए पाइपलाइन की कुल लागत पर करीब 18 हजार या फिर 60 फीसद तक की सब्सिडी दी जाएगी. ये भी पढ़ें:
सिंचाई के लिए नलकूप लगवाने के लिए 3 लाख से ज्यादा की सब्सिडी दे रही है ये सरकार किसानों के अन्य वर्ग की बात करें तो, उनकी लागत में करीब 15 हजार रुपये या 50 फीसद सब्सिडी दी जाएगी. ऐसे में अगर आप राजस्थान के किसान हैं, और इस स्कीम का फायदा लेना चाहते हैं. तो खेती के लायक जमीन अपने नाम होनी जरूरी है. इसके अलावा किसानों के पास और क्या कुछ होना जरूरी है यह भी जान लेना चाहिए.
  • किसानों के पास बिजली, डीजल या फिर ट्रैक्टर से चलने वाला पंप सेट होना जरूरी है.
  • किसानों के पास जरूरी कागजों में आधार कार्ड, जमीन के कागज और सिंचाई पाइपलाइन के बिल होने चाहिए.
  • सिंचाई पाइपलाइन की किसानों की खरीद उसी से करनी होगी, जिसका कृषि विभाग में रजिस्ट्रेशन हो.

वाटर टैंक निर्माण में पर मिलगी इतनी सब्सिडी

राजस्थान में खेती करने वाले लगभग हर तबके के किसानों को करीब 100 घन मीटर या फिर 1 लाख लीटर की क्षमता वाले वाटर टैंक के निर्माण करने पर 90 हजार रुपये का अनुदान सरकार देगी. वहीं किसानों को अगर इस योजना का फायदा लेना है तो, उनका नाम कम से कम आधास हेक्टेयर खेती की जमीन होनी जरूरी है. इसके लिए आवर कौन कौन सी चीजों का होना अनिवार्य है, ये जान लेते हैं.
  • आवेदन करने के लिए किसानों को अपना आधार कार्ड एयर जमीन की जमाबन्दी के कागज जमा करवाने होंगे.
  • किसानों के आवेदन करने बाद ही कृषि विभाग वाटर टैंक निर्माण के लिए प्रशासनिक स्वीकृति जारी करेगा.
  • इससे जुड़ी जानकारी किसानों को जिला कृषि विभाग में मोबाइल पर एसएमएस के जरिये दी जाएगी.

जानिए कैसे करें रजिस्ट्रेशन

अगर कोई किसान वाटर टैंक के निर्माण और सिंचाई पाइपलाइन की खरीद करना चाहता है, तो बता दें कि, इससे जुड़े अनुदान की योजनाएं एक दूसरे से अलग अलग हैं. जिनका लाभ पाने के लिए किसानों को किसान साथी पोर्टल रजिस्ट्रेशन करना होगा. जिसके बाद जिला कृषि विभाग रजिस्ट्रेशन का सत्यापन करेगा. अगर सब कुछ ठीक रहा तो, सरकार अनुदान की राशि सीधा किसानों के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करेगी.
अब नहीं रिसेगा पानी, प्लास्टिक फार्म पॉन्ड योजना से खेतों में बनेगा तालाब

अब नहीं रिसेगा पानी, प्लास्टिक फार्म पॉन्ड योजना से खेतों में बनेगा तालाब

किसानों की आमदनी को बढ़ाने के लिए राज्य सरकार पुरजोर कोशिश में है। जिसके चलते कई तरह की योजनाओं पर भी काम किया जा रहा है। जिसमें से एक है प्लास्टिक फार्म पॉन्ड योजना। इस योजना के अंतर्गत सरकार अनुदान भी दे रही है। बारिश का पानी इकट्ठा करके खेती के लिए इस्तेमाल करने के हिसाब से राजस्थान सरकार ने एक नई योजना पेश की है। इस योजना का नाम प्लास्टिक फार्म पॉन्ड है। प्लास्टिक फार्म पॉन्ड योजना के तहत किसानों एक लाख से भी ज्यादा का अनुदान राजस्थान सरकार की ओर से दिया जा रहा है। आपको बता दें की पहली बार गंगापुर सिटी एरिया में रेतीली जमीन पर प्लास्टिक लाइन फार्म पॉन्ड को बनाया गया है। इस पॉन्ड में आने वाले दिनों में बारिश के पानी को इकट्ठा करने में मदद मिलेगी। साथ ही, पानी जमीन में नहीं रिस पाएगा। जिसके बाद किसान भाई बारिश के पानी को जल संरक्षण के तौर पर खेती या फिर मछली पालन में इस्तेमाल कर पाएंगे।

दो साल से थी बड़ी चुनौती

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गंगा सिटी का यह सबसे रेतीला इलाका है। जहां फार्म पॉन्ड बनाना कृषि अधिकारियों के लिए करीब दो साल से चुनौती से भरा हुआ था। इसके अलावा इस विभाग के अंतर्गत लगभग दो दर्जन गांव स्थित हैं। जिनकी जमीन रेतीली है। पानी की किल्लत के चलते यहां की फसलों की सिंचाई के लिए किसान को बारिश पर ही निर्भर रहना पड़ता है।

सरकार की स्कीम पर किसानों को नहीं था इंटरेस्ट

आपको बतादें कि किसानों की इस समस्या को देखते हुए प्रदेश की सरका ने रेतीली जमीन में खेती किसानी करने वाले किसानों के लिए दो साल पहले ही प्लास्टिक फार्म पॉन्ड की स्कीम दी थी। लेकिन इस तरफ किसानों का कोई खास इंटरेस्ट नहीं था, जिसे देखते हुए विभागीय अधिकारीयों ने भी अपने कदम पीछे ले लिए।

नये सहायक कृषि अधिकारी ने किया प्रेरित

प्रदेश के गंगा सिटी इलाके में नये सहायक कृषि अधिकारी ने इस समस्या को चुनौती की तरह लिया और किसानों को सरकार की इस योजना के प्रति प्रेरित किया। जिसके कुछ दिनों के बाद ही उनकी मेहनत रंग लाने लगी और सलेमपुर गांव में किसानों ने फार्म पॉन्ड बनवा दिया। जिसके लिए करीब 20 मीटर की लम्बाई और चौड़ाई के साथ तीन मीटर की गहराई की गयी। ये भी पढ़ें: राजस्थान सरकार देगी निशुल्क बीज : बारह लाख किसान होंगे लाभान्वित

किसान कैसे उठा सकते हैं लाभ?

अगर किसान प्लास्टिक फार्म पॉन्ड योजना का फायदा उठाना चाहते हैं, तो उनके पास करीब 0.3 हेक्टेयर की जमीन और खेत का नक्शा होने के साथ ट्रेस और जन आधार कार्ड बैंक अकाउंट डिटेल सहित मोबाइल नंबर अपडेट होना चाहिए। इसके साथ ही किसानों को विभाग की तरफ से करीब एक लाख या उससे ज्यादा का अनुदान भी दिया जाता है। अगर किसानों ने इसके लिए आवेदन नहीं किया है, तो वह फार्म पॉन्ड योजना का फायदा भी नहीं उठा पाएंगे।

क्या कहते हैं कृषि अधिकारी?

कृषि अधिकारी के मुताबिक प्लास्टिक फार्म पॉन्ड बनाने के लिए सितंबर से अक्टूबर महीने में किसानों से संपर्क करके उन्हें शार्टलिस्ट किया गया है। इसके लिए किसानों को लगातार प्लास्टिक फार्म पॉन्ड बनाने के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है। राज्य सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्लास्टिक फार्म पॉन्ड में मछली पालन की परमिशन भी दे रखी है। इससे पहले प्लास्टिक फार्म पॉन्ड में किसान मछली पालन का काम नहीं कर सकते थे। अगर वो ऐसा करते भी थे तो, सख्त कारवाई भी की जाती थी। लेकिन किसानों की इनकम बढ़े इसके लिए राज्य सरकार नया प्रोविजन ला चुकी है।
महाराष्ट्र सरकार की इस योजना से किसानों को 1 रुपये ब्याज पर मिलेगा फसल बीमा

महाराष्ट्र सरकार की इस योजना से किसानों को 1 रुपये ब्याज पर मिलेगा फसल बीमा

जलवायु बदलाव के दुष्परिणामों की वजह से फसल को बेहद हानि का सामना करना पड़ रहा था। परंतु, फिलहाल नव वर्ष के बजट से इस चिंता का भी समाधान कर दूर कर दिया गया है। महाराष्ट्र सरकार द्वारा 1 रुपये ब्याज पर फसल बीमा देने की घोषणा की गई है। आज पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणाम झेल रहा है। इसका सर्वाधिक दुष्प्रभाव खेती किसानी पर देखने को मिल रहा है। आकस्मिक बारिश, ओले, बाढ़, सूखा जैसी प्राकृतिक आपदाओं के चलते फसलें क्षतिग्रस्त होती जा रही हैं। जो कि ऐसी स्थिति है जब स्वयं किसान भी आर्थिक समस्याओं में फंस जाते हैं। देश में भी जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव साफ तौर पर देखने को मिल रहे हैं। बीते वर्ष विभिन्न राज्यों में मौस्मिक मार से काफी फसल हानि देखी गई है। महाराष्ट्र में भी कुछ इसी तरह की परिस्थितियां देखने को मिलीं हैं। किसानों को बड़ी हानि से बचाने हेतु महाराष्ट्र सरकार द्वारा आर्थिक मदद देने की घोषणा की गई थी। परंतु, हाल ही में इस परेशानी का स्थायी समाधान निकालते हुए प्रदेश सरकार द्वारा 1 रुपये में फसल बीमा करवाने का ऐलान किया है।

मात्र 1 रुपये ब्याज पर मिल पाएगा फसल का बीमा

देश में प्राकृतिक आपदाओं की वजह से हुई फसल बर्बादी की भरपाई करने हेतु
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जारी की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत किसान स्वयं की फसल के संरक्षण हेतु एक निश्चित बीमा प्रीमियम प्रदान करता है। बदले में हानि होने की स्थिति में बीमा कंपनियों के साथ-साथ केंद्र एवं राज्य सरकारें किसानों की आंशिक भरपाई करती हैं। परंतु, फिलहाल महाराष्ट्र सरकार द्वारा राज्य स्तर पर 1 रुपये के ब्याज पर बीमा योजना का ऐलान कर दिया है। इसका सर्वाधिक लाभ उन किसानों को प्राप्त होगा, जो छोटी भूमि पर कृषि करते हैं अथवा बड़ा बीमा प्रीमियम भरने में असमर्थ होते हैं।

राज्य सरकार के द्वारा फसल हानि की भरपाई की जाएगी

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत रबी फसलों हेतु 1.5 फीसद, खरीफ फसलों हेतु 2 फीसद एवं बागवानी फसलों का बीमा करवाने हेतु 5 फीसद बीमा प्रीमियम जमा करना होता है। परंतु, महाराष्ट्र सरकार द्वारा फिलहाल यह चिंता भी समाप्त कर दी गई है। यह भी पढ़ें: PMFBY: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसान संग बीमा कंपनियों का हुआ कितना भला? प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री देवेंद्र फडणवीस का कहना है, कि पूर्व में फसल बीमा योजना का लाभ लेने वाले किसान भाइयों से बीमा की धनराशि का 2 फीसद ब्याज लिया जाता था। फिलहाल, सरकार 1 रुपये में फसल बीमा मुहैय्या करवाने की तैयारी में जुट रही है। इस योजना के अंतर्गत सरकारी खजाने से 3312 करोड़ रुपये का खर्चा किया जाएगा।

महाराष्ट्र राज्य में भी प्राकृतिक कृषि के क्षेत्रफल में होगी वृद्धि

कृषि क्षेत्र में रसायनों के बढ़ते उपयोग से ना केवल मृदा की उपजाऊ क्षमता कमजोर होती जा रही है। साथ ही, रसायन से उत्पादित कृषि उत्पादों से स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है। इसी वजह से फिलहाल अधिकांश राज्य सरकारें प्राकृतिक खेती का मॉडल अपना रही हैं। नव वर्ष के बजट में महाराष्ट्र सरकार द्वारा भी आगामी 3 वर्ष में 25 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल प्राकृतिक खेती के अंतर्गत लाने का निर्णय किया है। इसी योजना के अंतर्गत प्रदेश में 1000 बायो-इनपुट संसाधन केंद्र की स्थापना का भी लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
भूजल स्तर में गिरावट को देखते हुए इस राज्य में 1000 रिचार्जिंग बोरवेल का निर्माण किया जाएगा

भूजल स्तर में गिरावट को देखते हुए इस राज्य में 1000 रिचार्जिंग बोरवेल का निर्माण किया जाएगा

भारत के विभिन्न राज्यों से भूजल स्तर में गिरावट आने की खबर सामने आ रही है। फलस्वरूप फसल की पैदावार पर इसका दुष्प्रभाव पड़ रहा है। इस समस्या का निराकरण करने के लिए हरियाणा सरकार द्वारा प्रथम चरण में 1000 रीचार्जिंग बोरवेल की स्थापना करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। कृषि क्षेत्र में जल के प्रभावी उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिसके तहत विभिन्न राज्यों में ड्रॉप मोर क्रॉप योजना जारी की जा रही है। आपकी जानकारी के लिए बतादें कि न्यूनतम जल में सिंचाई करके नकदी एवं बागवानी फसलों से काफी अधिक पैदावार मिल रही है। भारत के बहुत सारे क्षेत्रों में भूमिगत जल संकट भी एक बड़ी चुनौती थी। हालाँकि, फिलहाल सूक्ष्म सिंचाई मॉडल द्वारा इन समस्त समस्याओं को दूर कर दिया है। यह सिंचाई पद्धति को उपयोग में लाना किसान भाइयों के लिए और भी सस्ता हो गया है। केंद्र सरकार के माध्यम से प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के चलते सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली स्थापित कराने के लिए किसान भाइयों को सब्सिडी का प्रावधान दिया गया है।

हरियाणा सरकार द्वारा दिया जा रहा है अनुदान

इसी कड़ी में अब हरियाणा सरकार ने भी ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति को बढ़ावा देने और रिचार्जिंग बोरवेल मुहैय्या कराने हेतु किसान भाइयों को सब्सिड़ी दी जा रही है। इस संबंध में सरकार का यह कहना है, कि हमारे इस प्रयास से जल संरक्षण एवं इसका संचयन करने में विशेष सहायता मदद प्राप्त होगी। साथ ही, यह घटते भूमिगत जल स्तर के संकट को भी दूर करने में सहायता करेगा।

किसानों को सूक्ष्म सिंचाई हेतु 85% अनुदान का प्रावधान

कृषि क्षेत्र में सिंचाई हेतु सर्वाधिक निर्भरता भूमिगत जल पर ही रहती है। जल की उपलब्धता को निरंतर स्थिर बनाए रखने के लिए जल की अधिक खपत वाली फसलों को हतोत्साहित किया जा रहा है। इसकी अपेक्षा बागवानी फसलों की कृषि को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही, सूक्ष्म सिंचाई मॉडल को प्रचलन में लाने के लिए किसानों को रीचार्जिंग बोरवेल पर सब्सिड़ी दी जा रही है। हिसार में आयोजित कृषि विकास मेले में हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने कहा है, कि वर्तमान हालात को ध्यान में रखते हुए हमें जल की खपत को कम करने की आवश्यकता है। इसके लिए ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को उपयोग में लाना होगा। क्योंकि यह किसानों के लिए सस्ता और सुविधाजनक होता है। साथ ही, राज्य सरकार सूक्ष्म सिंचाई को उपयोग में लाने के लिए किसान भाइयों को 85% अनुदान भी प्रदान कर रही है। ये भी देखें: सिंचाई की नहीं होगी समस्या, सरकार की इस पहल से किसानों की मुश्किल होगी आसान

1,000 रीचार्जिंग बोरवेल लगाने का लक्ष्य तय किया गया है

भारत में फिलहाल भूजल स्तर में आ रही गिरावट को पुनः ठीक करने के लिए वर्षा जल संचयन को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। इसी संबंध में राज्य सरकार रीचार्जिंग बोरवेल के निर्माण की योजना बना रही हैं, जिसके माध्यम से वर्षा के जल को पुनः भूमि के अंदर पहुंचाया जा सके। इस कार्य हेतु किसान भाइयों को 25,000 रुपये खर्च करने पड़ेंगे। इसके अतिरिक्त जो भी खर्चा होगा उसको हरियाणा सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।

इस तरह किसान आवेदन कर सकते हैं

हरियाणा सरकार द्वारा रीचार्जिंग बोरवेल पर आवेदन की प्रक्रिया को ऑनलाइन माध्यम से भी कर दिया गया है। अगर आप भी हरियाणा राज्य के किसान हैं और स्वयं के खेत में जल संचयन हेतु बोरवेल स्थापित कराना चाहते हैं, तब आप सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, हरियाणा की वेबसाइट hid.gov.in पर जाकर आवेदन किया जा सकता है। इसके बारे में विस्तृत रूप से जानकारी प्राप्त करने के लिए स्वयं के जनपद के कृषि विभाग के कार्यालय में भी संपर्क कर फायदा उठा सकते हैं।
अब किसानों को घर बैठे मिलेगा कृषि योजनाओं का लाभ, इस एप पर मिलेगी सम्पूर्ण जानकारी

अब किसानों को घर बैठे मिलेगा कृषि योजनाओं का लाभ, इस एप पर मिलेगी सम्पूर्ण जानकारी

सरकार लगातार किसानों की सुविधाओं का ध्यान रखने का प्रयत्न करती है, इसके लिए समय-समय पर नई योजनाएं चलाई जाती हैं। जिससे किसान भाई आर्थिक रूप से मजबूत होते हैं साथ ही खेती किसानी में भी तरक्की करते हैं। लेकिन किसानों के साथ एक समस्या अब भी बनी हुई हैं कि किसानों को खेती बाड़ी से संबंधित योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए  कृषि विभाग या ई-मित्र सेवा केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। अब राजस्थान सरकार ने इस समस्या का पूरी तरह से समाधान कर दिया है। अब सरकार ने 'राज किसान सुविधा मोबाइल एप्लीकेशन' लॉन्च किया है जिसके माध्यम से अब किसान भाई घर बैठे बिना किसी मशक्कत के सरकारी योजनाओं का लाभ बेहद आसानी से ले पाएंगे। इस एप्लीकेशन को किसान भाई अपने मोबाइल में डाउनलोड कर सकते हैं। साथ ही इस एप्लीकेशन के माध्यम से बेहद आसानी से सरकारी योजनाओं में पंजीकरण और आवेदन कर सकते हैं।

इन लोगों को मिलेगा राज किसान सुविधा एप्लीकेशन का लाभ

राजस्थान सरकार की तरफ से जारी किए गए इस एप्लीकेशन का लाभ कृषि,
बागवानी, पशुपालन और कृषि मार्केटिंग से जुड़े लोगों को मिल सकेगा। अब लोग बेहद आसानी से योजनाओं या सुविधाओं की जानकारी एप्लीकेशन के माध्यम से हासिल कर सकेंगे। राजस्थान सरकार के अधिकारियों ने बताया है कि इस एप्लीकेशन पर राजस्थान सरकार की सभी योजनाओं की जानकारी विस्तृत रूप से उपलब्ध है। सरकारी अधिकारियों ने यह भी बताया है कि एप्लीकेशन पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि बागवानी और पशुपालन की जानकारी एक जगह पर उपलब्ध करवा दी गई है ताकि किसान भाइयों को जानकारी प्राप्त करने के लिए परेशान न होना पड़े। ये भी देखें: करनी है बंपर कमाई, तो बनिये बागवानी मिशन का हिस्सा

एप्लीकेशन पर मिलेंगी ये सुविधाएं

राजस्थान के कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया है कि राज किसान सुविधा एप्लीकेशन पर किसानों की सहूलियत के लिए हर तरह की जानकारी उपलब्ध करवाई गई है। अब किसान एप्लीकेशन के माध्यम से कृषि यंत्रों की किसी भी प्रकार की जानकारी हासिल कर सकते हैं साथ ही एप्लीकेशन पर रजिस्टर करके सीधे कृषि यंत्र की बुकिंग करवा सकते हैं। जिससे कुछ दिनों बाद कृषि यंत्र किसान के घर डिलीवर हो जाएगा। इसके अलावा इस एप पर खेती करने की तकनीकों के वीडियो, मौसम की जानकारी, खाद बीज से संबधित सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध होगी। साथ ही उर्वरक, कीटनाशक के विक्रेताओं की लिस्ट, कोल्ड स्टोरेज की जानकारी, फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की जानकारी भी उपलब्ध होगी। यह एप्लीकेशन खेती किसानी से जुड़ी हर तरह की जानकारी उपलब्ध करवाता है।

इस एप्लीकेशन कर आसानी से दर्ज करवा सकते हैं फसलों को हुए नुकसान की शिकायत

इन दिनों राजस्थान में आंधी, पानी और ओलावृष्टि की लहर चल रही है। जिसके कारण किसानों की सैकड़ों एकड़ की फसलें तबाह हो गई हैं। साथ ही कई बीमारियों के कारण फसलें बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं। इन सब को देखते हुए राजसथान सरकार ने इस एप्लीकेशन में फसलों को हुए नुकसान की शिकायत दर्ज करवाने का भी विकल्प दिया है ताकि किसान भाई बिना किसी परेशानी के फसलों को होने वाले नुकसान का ब्यौरा सरकार तक पहुंचा पाएं। जिससे सरकार को किसानों को मुआवजा देने में आसानी हो। इसके लिए सरकार ने इस एप्लीकेशन में फसल बीमा का अलग से कॉलम दिया है।
यह राज्य सरकार पानी बचाने के लिए दे रही है पैसा, 85 प्रतिशत तक मिल सकती है सब्सिडी

यह राज्य सरकार पानी बचाने के लिए दे रही है पैसा, 85 प्रतिशत तक मिल सकती है सब्सिडी

ग्लोबल वार्मिंग और भूमिगत जल के अत्याधिक दोहन के कारण धरती का भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है, ऐसे में लोगों के साथ ही किसानों के सामने भी भविष्य में बड़ी परेशानी सामने आ सकती है। जहां लोगों के लिए पेयजल एवं किसानों के लिए सिंचाई के लिए जल की उपलब्धता में कमी आ सकती है। क्योंकि इन दिनों खेती किसानी में पानी का बहुतायत में उपयोग किया जा रहा है। खेती किसानी में अब नए यंत्रों का इस्तेमाल भी किया जा रहा है जो पानी की बेतहासा बर्बादी करते हैं। खेतों में पानी की सिंचाई करके किसान भाई अच्छी खासा उत्पादन करते हैं जिनसे उन्हें मुनाफा होता है। लेकिन भूमिगत जल के कम होने की समस्या बेहद विकराल रूप ले चुकी है। गिरते हुए भूमिगत जल को देखते हुए अब सरकार ने दूसरी सिंचाई पद्धतियों को अपनाना शुरू कर दिया है जिससे पानी की खपत को कम किया जा सके। इसमें ड्रिप सिंचाई एक बेहतरीन तकनीक है जिससे किसान भाई भारी मात्रा में पानी की बचत कर सकते हैं। इसके साथ ही सूक्ष्म सिंचाई मॉडल ने भी कम होते पानी की चिंता को दूर किया है। इसके लिए सरकार किसानों को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत सूक्ष्म सिंचाई सिस्टम लगवाने के लिए सब्सिडी प्रदान कर रही है। इसी को देखते हुए अब हरियाणा की सरकार भी आगे आई है और हरियाणा की सरकार ने कहा है कि ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति अपनाने और रिचार्जिंग बोरवेल इंस्टॉल करवाने वाले किसानों को सब्सिडी प्रदान की जाएगी। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इससे क्षय होते भूमिगत जल को रोका जा सकता है साथ ही पानी के संचयन में विशेष मदद मिलने वाली है। इससे भूमिगत जल को तेजी से रिकवर किया जा सकता है।

किसानों को इतनी मिल सकती है सब्सिडी

इन दिनों अगर सिंचाई की बात करें तो भूमि के एक बहुत बड़े हिस्से की सिंचाई भूमिगत जल के द्वारा की जाती है। जिसके कारण भूमिगत जल का लगातार इस्तेमाल किया जा रहा है। जो पर्यावरण में नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। हालांकि इससे बागवानी फसलों को प्रोत्साहन मिल रहा है लेकिन इससे फायदे होने की जगह नुकसान ज्यादा हैं। इसको देखते हुए अब हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने घोषणा की है कि सूक्ष्म सिंचाई मॉडल अपनाने के लिए अब किसानों को 85% तक की सब्सिडी दी जाएगी। इस मॉडल में किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को अपनाना होगा। ये किसानों के लिए बेहद सस्ता और सुविधाजनक भी है। ये भी देखें: 75 फीसद सब्सिडी के साथ मिल रहा ड्रिप स्प्रिंकलर सिस्टम, किसानों को करना होगा बस ये काम

पहले चरण में इतने लोगों को दी जाएगी सब्सिडी

सरकार ने बताया है कि सूक्ष्म सिंचाई मॉडल के अंतर्गत गिरते भूजल स्तर को वापस रिकवर करने के लिए सरकार रीचार्जिंग बोरवेल लगाने की योजना पर काम कर रही है। जिससे बरसात के पानी का संचयन करके उसे वापस जमीन में पहुंचाया जा सके। सरकार ने बताया है कि रीचार्जिंग बोरवेल लगाने के लिए किसान को मात्र 25 हजार रुपये खर्च करने होंगे। इसके बाद जो भी खर्च आता है वो हरियाणा की सरकार वहन करेगी। पहले चरण में राज्य में सरकार ने 1 हजार रीचार्जिंग बोरवेल लगाने का लक्ष्य रखा है।

सब्सिडी प्राप्त करने के लिए इस प्रकार करें आवेदन

हरियाणा सरकार की ओर से कहा गया है कि अब आवेदन करने के लिए किसान भाइयों को किसी भी प्रकार से परेशान होने की जरूरत नहीं है। इस पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया गया है। इसके लिए इच्छुक किसान भाई हरियाणा सरकार के सिंचाई और जल संसाधन विभाग की वेबसाइट hid.gov.in पर जाकर बेहद आसानी से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा किसान भाई अधिक जानकारी के लिए अपने जिले के कृषि विभाग में भी संपर्क कर सकते हैं और इस योजना का लाभ ले सकते हैं।